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बाराबंकी के रहने वाले बाबा महात्मा गांधी को ट्रेन से उतारा गया,पहनावे का उड़ाया मजाक  स्टेशन अधीक्षक निलंबित


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Lucknow: रिपोर्ट : देवेंद्र पाण्डेय, रीडर टाइम्स बाराबंकी : महात्मा गांधी  जैसे धोती पहनावा वाले बाबा को अपमानित करने के मामले में स्टेशन अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है l बाराबंकी के मूसेपुर थुरतिया के बाबा रामअवध दास,को अपमानित कर रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस में ना चढ़ने देने के मामले में रेल प्रशासन सख्त हो गया है l आपको बता दें कि इटावा जंक्शन पर बीते गुरुवार को गांधीजी धोती और रबर की हवाई चप्पल पहने वृद्ध का रेल कर्मियों द्वारा उपहास उड़ाने और ट्रेन में ना बैठने देने के मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर स्टेशन अधीक्षक पूरणमल मीणा को प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है l उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रयागराज मंडल ने माना है कि इससे रेलवे की छवि पर बुरा प्रभाव पड़ा है l मामले को स्टेशन अधीक्षक ठीक से हैंडल नहीं कर पाए इसलिए उन पर कार्यवाही की गई है l वहीं इस मामले में जांच प्रयागराज मंडल के अधिकारियों की सरिता से लग रहा है कि वह रिवर्स शताब्दी के स्टाफ को संवेदनहीन मान रहे हैं l उच्च अधिकारियों के निर्देश में जांच की रफ्तार भी तेजी से इजाफा हो रहा है l कई बार दिल्ली प्रयागराज से उच्च अधिकारियों के फोन आने से स्थानीय अफसरों में बेचैनी बढ़ने लगी है l जिसके बाद अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई चप्पल पहनने वाले शख्स को भी हवाई जहाज की यात्रा कराने की योजना को रेलवे के कर्मी ही ठेंगा दिखा रहे हैं। शताब्दी एक्सप्रेस का कन्फर्म टिकट होने के बाद भी कोच कंडक्टर ने एक वृद्ध को कोच में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं करने दिया l क्योंकि उसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह धोती को अपने शरीर से लपेट रखा था और उसने पैर में रबर की चप्पल धारण कर रखी थी। इस प्रकरण से तो एक महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका का प्रकरण जेहन में आ जाता है। 7 जून 1893 को दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को ट्रेन से धक्के मारकर सिर्फ इसलिए उतार दिया गया था क्योंकि वह अश्वेत थे। ठीक ऐसी ही घटना 126 वर्ष बाद इटावा जंक्शन पर घटी, जब दुबली-पतली काठी वाले 72 वर्षीय बाबा रामअवध दास को कन्फर्म टिकट होने के बाद भी ट्रेन में इसलिए नहीं चढ़ने दिया गया, क्योंकि वह जो धोती पहने थे, वही लपेटे भी थे। रबर की चप्पल पहने थे। कोच कंडक्टर और सिपाही ने उपहास कर अंग्रेजी हुकूमत का तीखा दर्द दोहरा दिया, जो रंग और पहनावे के आधार पर भारतीयों का दमन करता था। बाबा इस अपमान को रेलवे की शिकायत पुस्तिका में दर्ज कराकर बस से गंतव्य को रवाना हुए। बाराबंकी जनपद के रहने वाले बाबा रामदास इटावा जंक्शन से गाजियाबाद के लिए गुरुवार 4 जुलाई को कानपुर से नई दिल्ली के मध्य चलने वाली रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस (12033) का टिकट ऑनलाइन बुक किया था। ट्रेन के सी-2 कोच में 72 नंबर सीट कंफर्म थी, इसका उल्लेख आरक्षण चार्ट में भी है। ट्रेन सुबह 7.40 बजे इटावा आई तो वह निर्धारित कोच में चढ़ने लगे, तभी गेट पर मौजूद सिपाही ने उनको टोका। इसी दौरान कोच कंडक्टर भी आ गया। उसने वृद्ध का हुलिया देख उनका उपहास उड़ाया। सिपाही के अभद्रता करने पर उन्होंने टिकट दिखाया, लेकिन उनकी बात सुनी नहीं गई। दो मिनट होते ही 7.42 बजे ट्रेन चल दी, इससे वह ट्रेन में सवार नहीं हो पाए। नाराज बुजुर्ग स्टेशन मास्टर प्रिंसराज यादव के पास पहुंचे। स्टेशन मास्टर ने उन्हें बैठाया और बात सुनकर शांत करने का प्रयास किया। इसके बाद मगध एक्सप्रेस से गाजियाबाद भिजवाने की बात कही पर वृद्ध नहीं माने। उन्होंने शिकायत पुस्तिका में अपनी बात दर्ज करवाकर कहा कि इस अपमान ने आहत किया है, रेलमंत्री से इसकी शिकायत करूंगा। इसके बाद ट्रेन के बजाय बस से गाजियाबाद के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई चप्पल पहनने वाले शख्स को भी हवाई जहाज की यात्रा कराने की योजना को रेलवे के कर्मी ही ठेंगा दिखा रहे हैं। शताब्दी एक्सप्रेस का कन्फर्म टिकट होने के बाद भी कोच कंडक्टर ने एक वृद्ध को कोच में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं करने दिया क्योंकि उसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह धोती को अपने शरीर से लपेट रखा था और उसने पैर में रबर की चप्पल धारण कर रखी थी। इस प्रकरण से तो एक महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका का प्रकरण जेहन में आ जाता है। 7 जून 1893 को दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को ट्रेन से धक्के मारकर सिर्फ इसलिए उतार दिया गया था क्योंकि वह अश्वेत थे। ठीक ऐसी ही घटना 126 वर्ष बाद इटावा जंक्शन पर घटी, जब दुबली-पतली काठी वाले 72 वर्षीय बाबा रामअवध दास को कन्फर्म टिकट होने के बाद भी ट्रेन में इसलिए नहीं चढ़ने दिया गया, क्योंकि वह जो धोती पहने थे, वही लपेटे भी थे। रबर की चप्पल पहने थे। कोच कंडक्टर और सिपाही ने उपहास कर अंग्रेजी हुकूमत का तीखा दर्द दोहरा दिया, जो रंग और पहनावे के आधार पर भारतीयों का दमन करता था। बाबा इस अपमान को रेलवे की शिकायत पुस्तिका में दर्ज कराकर बस से गंतव्य को रवाना हुए। भक्त के घर जा रहे थे गाजियाबाद बाबा राम अवधदास ने बताया कि वह बाराबंकी में रहते हैं और भक्तों के घर जाते रहते हैं। इटावा के इंद्रापुरम में भक्त सत्यदेव के घर आए थे और यहां से उन्हें गाजियाबाद के विजय नगर निवासी भक्त के घर जाना था।